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बीजेपी जनसंख्या नियंत्रण को बना सकती है मुद्दा, हलचल बढ़ी

हैदराबादः बीजेपी, पीडीपी, शिवसेना और कुछ अन्य दलों के सांसद ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर जनसंख्या नियंत्रण पर सख्त कानून बनाने की मांग की है. साथ ही जनसंख्या नियंत्रित करने के लिए सांसदों ने एक ड्राफ्ट भी तैयार किया था जिसे राष्ट्रपति को सौंपा गया. लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि 2014 में ही नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद दो बच्चों के नियम सरकारी नौकरियों के लिए बनाए जाने की चर्चा हुई, पर बाद में भाजपा ने चुप्पी साध ली थी.

गुरुवार को सांसदों ने राष्ट्रपति से जनसंख्या नियंत्रण कानून के मुद्दे को लेकर मुलाकात की थी, जिसमें बीजेपी सांसद संजीव बालियान, उदय प्रताप सिंह, लक्ष्मण यादव, मीनाक्षी लेखी, शिवसेना के अरविंद सावंत, टीडीपी के राम बाबू नायडू और जयदेव गल्ला, निशिकांत दुबे और भोला सिंह समेत 125 सांसदों ने एक साथ हस्ताक्षर कर जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग की थी, हालांकि इसमें कुछ अन्य दलों के नेता और सांसद थे, मगर कांग्रेस के सांसद इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं थे.

यहां सवाल उठता है कि क्या भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर सभी पार्टियों के साथ मिलकर इस मुद्दे को अभियान के तौर पर खड़ा करने की कोशिश कर रही है. तीन तलाक और कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद राम मंदिर का मुद्दा और राम मंदिर के निर्माण के रास्ते प्रशस्त होने के बाद कहीं ना कहीं भाजपा के लिए नई रणनीति तैयार करना 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए आवश्यक है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में जिन एजेंड़ों पर जनता से वादे किए थे वह लगभग भाजपा और सत्ताधारी पार्टी ने पूरी कर दी है. अब देखना यह है कि कौन से नए मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और उनकी सरकार नई रणनीति के साथ आती है. हालांकि भारतीय जनता पार्टी के नेता काफी दिनों से सरकारी नौकरियों में दो बच्चे वाले दंपतियों को ही अनुशंसा दिए जाने की मांग उठा रहे हैं, मगर यह मामला अभी तक तूल नहीं पकड़ पाया था क्योंकि इस पर कई सवाल उठा दिए गए थे.

मगर अब जिस तरह से सांसदों ने एनजीओ के साथ मिलकर ड्राफ्ट तैयार किए हैं, उसमें साफ तौर पर कई महत्वपूर्ण बातें लिखकर राष्ट्रपति को सौंपी गई हैं. जिनमें मुख्य तौर पर 2 बच्चों के बाद तीसरे बच्चे पर दंडात्मक कार्रवाई बायोलॉजिकल माता-पिता पर हो. तीसरा बच्चा पैदा करने वालों की सब्सिडी बंद कर दी जाए. सरकारी अनुदान समाप्त कर दी जाए. देश में दो बच्चों की नीति और कानून लागू किया जाए. तीसरा बच्चा पैदा करने वालों को आजीवन मताधिकार से वंचित किया जाए. चौथा बच्चा पैदा करने वालों पर जुर्माने के साथ-साथ 10 साल की जेल का भी प्रावधान हो.

हालांकि इन सांसदों की तरफ से तैयार किया गया ज्ञापन बहुत ज्यादा व्यावहारिक नजर नहीं आ रहा है, मगर इस बारे में जब ईटीवी भारत ने संजीव बालियान से पूछा तो उन्होंने कहा कि देश में आबादी विस्फोटक स्थिति पर पहुंच चुकी है. इसलिए हम सांसद चाहते हैं कि सरकार इस पर तत्काल जनसंख्या नियंत्रण कानून लाए. यह किसी एक पार्टी का मामला नहीं है और इसमें सभी दलों को साथ आना चाहिए और जो इन कानून का उल्लंघन करे उन्हें सजा और जुर्माने का प्रावधान किया जाना चाहिए.

इसी तरह शिवसेना के सांसद अरविंद सावंत का कहना है कि यह कोई भाजपा का अभियान नहीं है, भाजपा से पहले शिवसेना इस मुद्दे पर सवाल उठाती आई है और संसद में भी कई बार दो बच्चों के कानून बनाए जाने की मांग कर चुकी है, इसलिए हम लोगों ने इस प्रतिनिधिमंडल का साथ दिया और राष्ट्रपति से भी यह मांग की है और हम चाहते हैं कि इस पर दलगत राजनीति नहीं होनी चाहिए, बल्कि सभी दलों के लोगों को आगे आना चाहिए.

अगर देखा जाए तो इसमें वही दल शामिल थे जो पहले भी संसद में कभी न कभी जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने के लिए आवाज उठाते रहे हैं. चाहे वह टीडीपी हो, भारतीय जनता पार्टी या शिवसेना हो. यह दल पहले से ही जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सख्त कानून बने इस बात की मांग संसद में भी कई बार उठाते नजर आए हैं.

हालांकि इस बात का संसद में प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने कड़ा विरोध भी किया था और कांग्रेस के साथ ही एमिनेम जैसी पार्टियों ने इसे भाजपा का एजेंडा बताया था. ऐसे में यह मांग एक बार फिर उठना वह भी आने वाले मानसून सत्र से पहले अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह मामला धीरे-धीरे अब तूल पकड़ रहा है और एक अभियान का रूप जल्द ही ले सकता है और उम्मीद की जा रही है कि यह सांसद इस मामले को आने वाले मानसून सत्र में भी जोर शोर से उठाएंगे.

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